आरती

झाँकी उमा महेश की , आठों पहर किया करूँ ।
नयनों के पात्र में सुधा, भर-भर के मैं पिया करूँ॥
॥ झाँकी उमा महेश की...॥
वाराणसी का वास हो, और न कोई पास हो ।
गिरिजापति के नाम का, सुमिरण भजन किया करूँ॥
॥ झाँकी उमा महेश की...॥
जयति जय महेश हे, जयति नन्दिकेश हे।
जयति जय उमेश हे, प्रेम से जपा करूँ॥
॥ झाँकी उमा महेश की...॥
अम्बा कहीं श्रमित न हो, सेवा का भार मुझको दो ।
जी भर के तुम पिया करो, मैं घोट के दिया करूँ॥
॥ झाँकी उमा महेश की...॥
मन को तुम्हारी है लगन, उधर खींचते हैं व्यसन ।
हरदम चलायमन मन, इसका उपाय क्या करूँ॥
॥ झाँकी उमा महेश की...॥
भिक्षा में नाथ दीजिए, अपनी शरण में लीजिए ।
ऐसा प्रबन्ध कीजिए , सेवा में मै रहा करूँ॥
॥ झाँकी उमा महेश की...॥
तुम तो जगत के नाथ हो, सब पर दया का हाथ हो ।
मैं ही निराश हे प्रभु , तुम्हारे द्वार से क्यों फिरूँ॥
॥ झाँकी उमा महेश की...॥
बेकल हूँ नाथ रात दिन, नहीं चैन प्रभु आप बिन ।
मैं तो सब्र कर भी लूँ, दिल का उपाय क्या करूँ॥
॥ झाँकी उमा महेश की...॥